Best Short Stories stories in hindi read and download free PDF

ggggg
by Zaverchand Meghani

Hi he is a time to get the latest flash player is required for video playback to me tuje pay for a while and then another to be a ...

इंतज़ार
by Anju Gupta
  • 111

कहते हैं प्यार किया नहीं जाता बस हो जाता है ! पर ना जाने क्यों, ये अक्सर वहीं क्यों हो जाता है, जहाँ कायदे से इसे नहीं होना चाहिए ...

सन 3019
by Niyati Kapadia
  • 14

सन 3019 एक हवा में उड़ते स्पेस शीप में से कायरा ने देखा उसका बेटा एक अजीब से प्राणी के साथ जमीन पर खड़ा बाते कर रहा था। उस प्राणी ...

जीवन की एक नई शुरुआत
by Saroj Prajapati
  • 34

राजेंद्र जी कमरे में अकेले बैठे एकटक दीवार पर लगी ताजमहल की तस्वीर को निहार रहे थे। उन्हें याद है जब सुदेश ने एक बार बड़े प्यार से कहा ...

लम्हों की गाथा - 5
by Seema Jain
  • 11

13 - बुलबुल 14 - काज़ल 15 - परिवार

फूल गुलाब सी वह लड़की
by Ashish Dalal
  • 14

फूल गुलाब सी वह लड़की शुचि. विश्वास और साहस से भरा वह लड़का अनिकेत. यह उनकी किस्मत ही थी कि कॉलेज की सीढ़ियां साथ उतरकर जिन्दगी की सीढ़ियां चढ़ते ...

लेफ्ट साइड से राइट साइड
by Niyati Kapadia
  • (15)
  • 11

स्वीटी की आज एक्जाम थी, वह समय रहते कॉलेज जाने के लिए निकली थी। पर ये क्या? उसकी गाड़ी के ग्लास पर किसी बर्डने पोटी करदी थी। उसने कपड़े ...

मौत तू डराती क्यों है...?
by Ajay Kumar Awasthi
  • 8

कभी अचानक किसी विस्फोट की तरह, किसी मशीन के विशाल जबड़े में फंसकर टुकड़े टुकड़े हो जाना ,किसी तेज रफ्तार गाड़ी के पहिये के नीचे .कभी आहिस्ते से शरीर ...

नाकाम या असहाय प्रशासन
by NR Omprakash Athak
  • 9

बात सितम्बर माह की हैं। जब एक 12वी पढ़ने वाली 15 वर्षीय लड़की समाज और परिवार के किसी भी सदस्य से मदद नहीं मिली तो प्रशासन से ही मदद ...

बिदाई
by Raje.
  • 23

मैने-जमाने ने भी देखा था। सुर्खलाल रंग, तेरी आँखों का, आसु अपनो से बीछडने के थे, या फिर ....... पता नही ?

लम्हों की गाथा - 4
by Seema Jain
  • 20

10 - काशी दिआं लकिरां 11 - खाली हाथ 12 - नादान

आदत से मजबुर
by Niyati Kapadia
  • (25)
  • 17

आज सुबह से मीनू कुछ उदास सी दिखाई पड रही थी। घरके कामकाज में भी उसका ध्यान न था। बार बार बरतन पटकने की आवाज़े आ रही थी। बीच ...

मां बहुत परेशान करती है ।
by Ashish Dalal
  • 7

‘देखो, मुझसे नहीं होता अब । सारा दिन थक जाती हूं मैं ।’ खाना खाकर जैसे ही वह हाथ धोकर कुर्सी पर बैठा तो वह दो घड़ी उसके संग ...

लम्हों की गाथा - 3
by Seema Jain
  • 31

7 - फाँस 8 - बचपन 9 - गाइड

मृणालिनी
by Ashka Shukal
  • 10

© आशका शुक्ल "टीनी" ©  यह रचना के सारे कॉपीराइट्स लेखक के खुद के हाथों में है । अगर यह रचना कोई भी जगह पर पर्सनल वेबसाइट, कोई पुस्तक ...

पिता की छाया
by Hareesh Kumar Sharma
  • 12

मां ने अगर बच्चे को खाना खाना सिखाया है तो वहीं पर पिता बच्चे को खाना कमाना कर सिखाया है।मां अगर डांट से बचाकर हमें अपने आंचल में छुपा ...

लघुकथाएँ (दिव्यदान, कोथली)
by Gyan Prakash Peeyush
  • 11

दिव्य दान.......................मोहन सिंह मामूली हैसियत का आदमी था।  उसने मेहनत मजदूरी करके अपने बच्चों को आत्मनिर्भर बना दिया था। उसके बेटे- बहू बहुत अच्छे स्वभाव के थे। समय पर ...

इंदिरा एकादशी व्रत कथा 
by JYOTI PRAKASH RAI
  • 5

हम और आप सभी अपने अपने धार्मिक परंपराओं के अनुसार हर कार्य को सोच समझ कर ही करते हैं ! हमारे भारत मे छह ऋतुए हैं  १. शरद ऋतु- ...

लम्हों की गाथा - 2
by Seema Jain
  • 31

4 - गँवार 5 - हद हो गई 6 - ड़र

दो लघुकथाएं
by Krishna manu
  • 8

 लघुकथा1.भस्मासुर - अलख निरंजन!- आ जाइए बाबा पेड़  की छाह में।  बाबा के आते ही वह हाथ जोड़कर खड़ा हो गया- आज्ञा महाराज। बाबा ने खटिया पर आसन जमाया। बोले- बच्चा, तेरा ...

लम्हों की गाथा - 1
by Seema Jain
  • 15

1 - पानी 2 - भविष्य 3 - रोशनी

दिवाली के फटाके
by आदित्य पारीक
  • 29

मोहल्ले के घरों में रंग रोशन हो रहा था और उनसे निकलने वाली भीनी भीनी गंध ने माधव को दीवाली के आने का संकेत दे दिया माधव ने उत्सुकता ...

शृणु मे वचः
by Bhargav Patel
  • 8

शृणु मे वचःरक्त-सा रवि डूबा यों क्षितिज के पार; और लौटे महास्यंदन सारे शिविरों को। उतरे ध्वज नाना, शंखनाद भी हुए तब नीरव। देखते नयन दो अनिमेष दूर क्षितिज ...

ऐसी वाणी बोलिए…
by Saroj Prajapati
  • (11)
  • 4

राजेंद्र जी एक साधारण किसान परिवार से थे। बहुत कम उम्र में उनके पिता का निधन हो गया तो बड़ा बेटा होने के कारण सारी जिम्मेदारी उनके कंधों पर ...

आदिनिधन
by Bhargav Patel
  • 3

आदिनिधननेत्र अनिमेष, देख रहे एक वृक्ष। और जो सोया है उसकी छाँव में। जानते हैं नेत्र उसे... सहज पहचानते हैं। और वृक्ष बन वहीं खड़ी वह रह गयी। ज्यों ...

शिवानी का टुनटुनवा
by Upasna Siag
  • 17

शिवानी आज सुबह से मन ही मन बहुत खुश थी। रात को अच्छे से नींद भी नहीं आयी फिर भी एक दम तरो-ताज़ा लग रही थी। पूजा पाठ में भी ...

बिग बैंग
by Pritpal Kaur
  • 7

फाइल पर आख़िरी टिप्पणी कर के अपने हस्ताक्षर चिपकाये, झटके से फाइल बंद की और अपनी झुकी हुयी गर्दन सीधी की. सामने दीवार पर लगी घड़ी पर नज़र डाली ...

एक जंगल एक भाषा
by Siraj Ansari
  • 39

एक बार जंगल की सत्ता सियारों के हाथ लग गयी। उन्होंने "हुआ-हुआ" की आवाज़ को ही जंगल की राष्ट्रभाषा घोषित करने का निश्चय किया और अंदर ही अंदर जंगल ...

हुस्न कि तख़लीक़
by Saadat Hasan Manto
  • (23)
  • 10

कॉलिज में शाहिदा हसीन-तरीन लड़की थी। उस को अपने हुस्न का एहसास था। इसी लिए वो किसी से सीधे मुँह बात न करती और ख़ुद को मुग़्लिया ख़ानदान की ...

ख़्वाब....जो बता न सके
by Satender_tiwari_brokenwords
  • (12)

नैना की नौकरी विदेश में लग गयी थी। घर वाले खुश तो थे लेकिन वही बात है ना कि लड़की है कैसे रह पाएगी ? वही समाज के चार ...