Hindi Stories PDF Free Download | Matrubharti

आमची मुम्बई - 40
by Santosh Srivastav
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एक ज़माने में मुम्बई में पारदर्शी मीठे पानी की पाँच प्रमुख नदियाँ बहती थीं उल्हास नदी जहाँ चायना क्रीक में फिल्म वालों के आकर्षण का केन्द्र रही ...

पल जो यूँ गुज़रे - 14
by Lajpat Rai Garg
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कुछ वर्ष पूर्व तक सर्दी का मौसम होता था तो सर्दी ही होती थी। तापमान में दो—चार डिग्री का उतार—चढ़ाव तो सामान्य बात होती थी, जिसका कारण होता था, ...

कमसिन - 29
by Seema Saxena
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हर बात वो उनसे ही तो कह लेती थी इसीलिए आज माँ से ज्यादा भाभी की याद आ रही थी ! जो उसकी अपनी होकर भी अपनों से ज्यादा ...

मन्नू की वह एक रात - 26 - लास्ट पार्ट
by Pradeep Shrivastava
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‘जब मैंने अंदर देखा तो जो कुछ दिखा अंदर उससे मैं एकदम गड्मड् हो गई। सीडी प्लेयर चल रहा था। एक बेहद उत्तेजक ब्लू फ़िल्म चल रही थी। और ...

खट्टी मीठी यादों का मेला - 15
by Rashmi Ravija
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(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे, अपना पुराना जीवन याद करने लगती हैं. उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति ...

कमसिन - 28
by Seema Saxena
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राशी के पेपर हो चुके थे वह अब ज्यादातर समय उसके साथ ही बिताती ! घर में काकी माँ, माँ, राजीव और पापा जी भी बहुत ध्यान रखने लगे ...

मन्नू की वह एक रात - 25
by Pradeep Shrivastava
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'‘मैं ऐसी लड़की से ही शादी कर सकता हूं जो मेरे सामने जब आए तो मुझे ऐसा अहसास हो कि सामने तुम खड़ी हो। क्योंकि तुम्हारी जैसी जो होगी ...

आमची मुम्बई - 39
by Santosh Srivastav
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चर्चगेट से विरार तक जाने वाली लोकल ट्रेन मुम्बई की सबसे रोमाँचक यात्रा कराती है इस पर पीक आवर्स में चढ़ना तो दूर दरवाज़े पर लटकने भी ...

दस दरवाज़े - 31 - लास्ट प्रकरण
by Subhash Neerav
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हम पूरी धूमधाम से बारात लेकर छोटे-से शहर लूटन में ज्ञान सिंह के घर प्रदीप को ब्याहने पहुँचते हैं। प्रकाश के सभी रिश्तेदार आते हैं। बारात में हमारे भी ...

पल जो यूँ गुज़रे - 13
by Lajpat Rai Garg
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जब निर्मल सिरसा पहुँचा तो रात हो गयी थी। सर्दियों की रात। कृष्ण पक्ष की द्वादश और कोहरे का आतंक। रिक्शा पर आते हुए तीव्र शीत लहर उसकी हडि्‌डयों ...

आमची मुम्बई - 38
by Santosh Srivastav
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जनवरी लगते ही मुम्बई का आकाश और खाड़ियों के किनारे खूबसूरत गुलाबीपंखों वाले समुद्री पक्षी फ्लेमिंगो से भर जाता है मुम्बई में खारे समुद्री पानी की कई ...

खट्टी मीठी यादों का मेला - 14
by Rashmi Ravija
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(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे, अपना पुराना जीवन याद करने लगती हैं. उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति ...

कमसिन - 27
by Seema Saxena
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सुबह हो गयी थी ! आज कल्पना को उठने की इच्छा नहीं हो रही थी ! वह ऐसे ही लेटी रहना चाहती थी लेकिन माँ की पूजा और उनकी ...

मन्नू की वह एक रात - 24
by Pradeep Shrivastava
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मेरी यह दलील सुन कर चीनू एक बार फिर भड़क गया। बोला, '‘शादी-शादी-शादी, दिमाग खराब हो गया है तुम्हारा। तुम असल में मेरी शादी नहीं बल्कि अब मुझ से भी ...

दस दरवाज़े - 30
by Subhash Neerav
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चार साल बाद मैं इंडिया आता हूँ। उनसे विशेष रूप से मिलने जाता हूँ। इस दौरान उन्होंने अपनी कोठी बना ली है। खुश हैं। प्रकाश की शराब पीने की ...

आमची मुम्बई - 37
by Santosh Srivastav
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प्रकृति ने न केवल सुरम्य तटों की समृद्धि मुम्बई कोदी है बल्कि अरब महासागर के साथ-साथचली गई समुद्र रेखा के सामानांतर पश्चिमी घाट माथेरान, खंडाला, लोनावला, अम्बोली, एम्बीवैली और ...

पल जो यूँ गुज़रे - 12
by Lajpat Rai Garg
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तेईस दिसम्बर को दस बजे वाली बस से वह शिमला पहुँच गया। जाह्नवी अपने ड्राईवर गोपाल के साथ बस स्टैंड पर प्रतीक्षारत मिली। निर्मल को देखते ही उसे कुछ ...

कमसिन - 26
by Seema Saxena
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कल्पना ने सोचा उसने ऐसा क्या कर दिया जो राजीव इतना नाराज हो गया और अभी पूजा में तल्लीन थी पापा टी0वी0 में तो उसने सोचा थोड़ी देर छत ...

मन्नू की वह एक रात - 23
by Pradeep Shrivastava
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‘यह क्या फालतू बात कर रहे हो। मुझ बुढ़िया से शादी करोगे।’ इस पर वह बोला, ‘फालतू बात नहीं कर रहा हूं, जो कह रहा हूं सच कह रहा हूं। इतना ...

दस दरवाज़े - 29
by Subhash Neerav
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मुझसे यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है कि मेरी पहली मुहब्बत कौन थी। मैं याद करने लग जाता हूँ कि कौन थी मेरी पहली मुहब्बत। ऐसा सोचते ही कितने ...

खट्टी मीठी यादों का मेला - 13
by Rashmi Ravija
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(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे, अपना पुराना जीवन याद करने लगती हैं. उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति ...

कमसिन - 25
by Seema Saxena
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राजीव आ गये थे । कल्पना ने उनको चाय नाश्ता दिया ओर वहीं शान्त मन से बैठ गई । राजीव ने उसे देखकर मुस्कुराया किन्तु वह शान्त ही रही ...

मन्नू की वह एक रात - 22
by Pradeep Shrivastava
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‘मगर बच्चा गोद लेकर संतान वाली तो हो ही गई थी। और आगे का भविष्य क्या है यह भी जान गई थी। मैं ऐसा नहीं कह रही कि तुम ...

आमची मुम्बई - 36
by Santosh Srivastav
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जब भी वर्ली सी लिंक से गुज़रती हूँ लगता है समँदर मेरा हमसफ़र है नजाने मुझसे कहाँ-कहाँ की सैर करा देता है न जाने कितने ...

दस दरवाज़े - 28
by Subhash Neerav
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उससे अगले वर्ष मैं पिता को अपने साथ इंग्लैंड ले जाने के लिए जाता हूँ। मीता कहती है - “अब बाबा यहाँ नहीं होगा, हम भी माहिलपुर चले जाएँगे। वहाँ ...

पल जो यूँ गुज़रे - 11
by Lajpat Rai Garg
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पन्द्रह—बीस दिन बाद की बात है। निर्मल जब डिपार्टमेंट से हॉस्टल पहुँचा तो उसे कमला का पत्र मिला। कमला ने पत्र में लिखा था कि शिमला से सेबों की एक ...

आमची मुम्बई - 35
by Santosh Srivastav
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बांद्रा रिक्लेमेशन से वर्ली की आधा घंटे की दूरी आठ मिनट से भी कम समय में!! सचमुच यकीन नहीं होता, मगर ये संभव कर दिखाया है बाँद्रा वर्ली सी ...

खट्टी मीठी यादों का मेला - 12
by Rashmi Ravija
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(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे, अपना पुराना जीवन याद करने लगती हैं. उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति ...

कमसिन - 24
by Seema Saxena
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वह राजीव के साथ अपने घर आ गई थी पर अब वो अपना घर नहीं रहा था मायका था और सच में यही महसूस भी किया, जहाँ बचपन बीता, ...

मन्नू की वह एक रात - 21
by Pradeep Shrivastava
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‘अच्छा जब तुमने बच्चे को गोद ले लिया तो उसके बाद चीनू से किस तरह पेश आई। जबकि तुम्हारे कहे मुताबिक यदि वह जी-जान से न लगता तो तुम्हें ...