Best book reviews in English, Hindi, Gujarati and Marathi Language

बन्द दरवाज़ों का शहर - रश्मि रविजा
by राजीव तनेजा

अंतर्जाल पर जब हिंदी में लिखना और पढ़ना संभव हुआ तो सबसे पहले लिखने की सुविधा हमें ब्लॉग के ज़रिए मिली। ब्लॉग के प्लेटफार्म पर ही मेरी और मुझ ...

घर की देहरी लाँघती स्त्री कलम- समीक्षा
by Archana Anupriya

"घर की देहरी लांघती स्त्री कलम"           ( एक समीक्षा)                 - अर्चना अनुप्रिया              ...

पुस्तक समीक्षा-राजेन्द्र लहरिया
by राज बोहरे

पुस्तक समीक्षा-                            आलाप-विलाप: समझदारी और गहराई भरा कथ्य राजनारायण बोहरे                 आलाप-विलाप उपन्यास राजेन्द्र लहरिया का आकार में एक लघु उपन्यास है लेकिन इसके आशय बहुत ...

अभ्युदय - 1 - नरेंद्र कोहली
by राजीव तनेजा

मिथकीय चरित्रों की जब भी कभी बात आती है तो सनातन धर्म में आस्था रखने वालों के बीच भगवान श्री राम, पहली पंक्ति में प्रमुखता से खड़े दिखाई देते ...

पुस्तक समीक्षा- आसाम की जनता का सच: लाल नदी
by राज बोहरे

पुस्तक समीक्षा- आसाम की जनता का सच: लाल नदी समीक्षक- राजनारायण बोहरे हमारे देश का पूर्वी भाग सदा से अल्पज्ञात और उपेक्षित सा रहा है। उपेक्षित इस मायने में ...

પ્રેમ માટે પ્રત્યક્ષીકરણ
by Krishna Timbadiya

આ ખ્યાલ મને 'ઘ સિક્રેટ 'માંથી પ્રેરણા લઇને વાચક મિત્રોને સમક્ષ રજૂઆત કરવામાં મને આનંદ થયો છે. મારો ખ્યાલ મુજબ મારા જીવનનાં થયેલ સારા ફેરફાર ને વાચકો સમક્ષ રજૂ ...

पुस्तक समीक्षा - 12
by Yashvant Kothari

प्राइड एंड प्रिजुडिसयह उपन्यास १८१३ में लिखा गया जो सबसे पहले इंगलेंड में छपा jane Austen उस जमाने कीमशहूर लेखिका थीं उनके लिखे उपन्यास। आज भी क्लासिक माने जा ...

ग़लत पते की चिट्ठियाँ- योगिता यादव
by राजीव तनेजा

आज के इस अंतर्जालीय युग में जब कोई चिट्ठी पत्री की बात करे तो सहज ही मन में उत्सुकता सी जाग उठती  है कि आज के इस व्हाट्सएप, फेसबुक ...

How to Review a Book
by Dr Jitendra R RAOL

How to Review a Book       By JIRARA        © JIRARA, July 2020 Published by JIRARA On matrubharti.com   All rights reserved. No parts of ...

राज बोहरे की कहानी का गुलदस्ता: डॉ. पद्मा शर्मा
by राज बोहरे

                         कहानी का गुलदस्ता: मेरी प्रिय कथाएं डॉ. पद्मा शर्मा      मेरी प्रिय कथाएं      लेखक राजनारायण बोहरे                        -          पिछले दिनों प्रकाशित ‘ मेरी प्रिय कथाएं ’ ...

फुगाटी का जूता- मनीष वैद्य
by राजीव तनेजा
  • 121

जब कभी ज़माने की विद्रूपताएं एवं विसंगतियां हमारे मन मस्तिष्क को उद्वेलित कर उसमें अपना घर बनाने लगती हैं तो हताशा और अवसाद में जीते हुए हम में से ...

प्रेमचंद शैली में राज बोहरे - रूपेंद्र राज
by राज बोहरे
  • 176

                        गद्य साहित्य में कहानियों का इतिहास लगभग सौ वर्ष पुराना है.हिंदी साहित्य में जो स्थान मुंशी प्रेमचंद को मिला वहां तक का सफर अभी तक किसी कहानीकार ...

अमेरिका में 45 दिन - सोनरूपा विशाल
by राजीव तनेजा
  • 131

किसी भी देश, उसकी सभ्यता, उसके रहन सहन..वहाँ के जनजीवन के बारे में जब आप जानना चाहते हैं तो आपके सामने दो ऑप्शन होते हैं। पहला ऑप्शन यह कि ...

પંખીઘર: ‘સામાજિક નિસ્બત ધરાવતી વાર્તાઓ’
by Hardik Prajapati HP
  • 184

અનુ-આધુનિક ગુજરાતી વાર્તા સાહિત્યસ્વરૂપમાં અનેક નવી કલમો પ્રગટી તેમાં શ્રી અમૃત પરમારનું નામ પણ ધ્યાનાકર્ષક ખરું. આધુનિક સાહિત્ય તરફથી અનુ-આધુનિક સાહિત્ય તરફ ગતિ એટલે જનપદ, પ્રાદેશિક, દલિત, પીડિત, દરીબી ...

अक्कड़ बक्कड़- सुभाष चन्दर
by राजीव तनेजा
  • 139

आम तौर पर हमारे तथाकथित सभ्य समाज दो तरह की प्रजातियाँ पाई जाती हैं। एक कामकाजी लोगों की और दूसरी निठल्लों की। हमारे यहाँ कामकाजी होने से ये तात्पर्य ...

अंधेरे कोने@फेसबुक डॉट कॉम
by राजीव तनेजा
  • 145

जिस तरह एक सामाजिक प्राणी होने के नाते हम लोग अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए आपस में बातचीत का सहारा लेते हैं। उसी तरह अपनी भावनाओं को ...

‘રેતીનો માણસ’: રણપ્રદેશની વ્યથા-કથાની વાર્તા
by Hardik Prajapati HP
  • 328

ગુજરાતી ટૂંકીવાર્તામાં સમયે-સમયે નૂતન સર્જકોના હાથે નૂતન આવિષ્કારો ઝીલાતા રહ્યા છે. ટૂંકીવાર્તા અનુ-આધુનિક સમયમાં અન્ય સાહિત્યસ્વરૂપોની તુલનાએ વધુ લોકપ્રિય અને લોકભોગ્ય સ્વરૂપ બન્યું છે. ગુજરાતી સાહિત્યમાં અનુ-આધુનિકતાના સમયગાળામાં અનેક ...

જીવન સંગીત સજાવતા પુસ્તકો.
by Jagruti Vakil
  • 366

 જીવન સંગીતને સજાવતા  પુસ્તકો.                 વિચારોની ઉચ્ચતા,કલમની તાકાત, સાચા શુદ્ધ હૃદયનો ત્રિવેણી સંગમ દ્વારા જીવનતીર્થ ઉજાગર કરતા શ્રી સંજીવભાઈ શાહના ઓએસીસ પ્રકાશનના પુસ્તકો ખરા અર્થમાં સમાજ માટે ઉતમ નજરાણું ...

थोड़ा हँस ले यार- सुभाष चन्दर
by राजीव तनेजा
  • 212

आमतौर पर किसी व्यंग्य को पढ़ते वक्त हमारे ज़हन में उस व्यंग्य से जुड़े पात्रों को लेकर  मन में कभी त्रासद परिस्थितियों की वजह से करुणा तो कभी क्षोभ ...

વિમલ-સંજીવની ઝરમર
by Jagruti Vakil
  • 520

પહાડોમાં લાદ્યો મુજને વિમલ પ્રસાદ... “વિમલ સંજીવની ઝરમર”   (વિમલા ઠકારને કૃતજ્ઞતા અંજલિ) પ્રકાશન: ઓએસીસ પ્રકાશન વડોદરા. પાના:120 મુલ્ય: રૂ.120/-                 નવેસરથી ચારિત્ર્ય ઘડતર તરફ લઈ જતાઓએસીસ પ્રકાશનોના  પુસ્તકોમાં જીવનનો અખૂટ ...

खिड़कियों से झाँकती आँखें- सुधा ओम ढींगरा
by राजीव तनेजा
  • 212

आमतौर पर जब हम किसी फ़िल्म को देखते हैं तो पाते हैं कि उसमें कुछ सीन तो हर तरह से बढ़िया लिखे एवं शूट किए गए हैं लेकिन कुछ ...

જીવનની ભેટ
by Jagruti Vakil
  • 666

    જીવનની ભેટ લેખક : શ્રી સંજય શાહ પ્રકાશન :ઓએસીસ પ્રકાશન.વડોદરા મૂલ્ય: રૂ. ૪૦૦/-   પાના :૩૦૪            અવનવી, પ્રેરણાદાયી ટચુકડી વાર્તાઓનો સંગ્રહ ‘જીવનની ભેટ’ પુસ્તક  ખરા ...

अंजू शर्मा का महत्वाकांक्षी कहानी संग्रह-पुस्तक समीक्षा
by राज बोहरे
  • 365

                                               अंजू शर्मा का दूसरा कहानी संग्रह सुबह ऐसे आती है पुस्तक मेला 2020 में दिल्ली में विमोचन हुआ। भावना प्रकाशन से प्रकाशित इस कहानी संग्रह में लेखिका की ...

बहुत दूर गुलमोहर- शोभा रस्तोगी
by राजीव तनेजा
  • 230

जब कभी भी हम अपने समकालीन कथाकारों के बारे में सोचते हैं तो हमारे ज़हन में बिना किसी दुविधा के एक नाम शोभा रस्तोगी जी का भी आता है ...

ब्रज श्रीवास्तव -पुस्तक समीक्षा
by राज बोहरे
  • 2k

                          सृजन के असली क्षण है यह जब वह श्रमिक  कला के आनंद में भी डूबा है।        ऐसे दिन का इंतजार कवि बृज श्रीवास्तव का कविता संग्रह है ...

स्वप्नपाश- मनीषा कुलश्रेष्ठ
by राजीव तनेजा
  • 1.2k

कई बार हमें पढ़ने के लिए कुछ ऐसा मिल जाता है कि तमाम तरह की आड़ी तिरछी चिंताओं से मुक्त हो, हमारा मन प्रफुल्लित हो कर हल्का सा महसूस ...

शुभ बुद्धीचे उपासक रवींद्रनाथ(पुस्तक परीक्षण)
by Aaryaa Joshi
  • 201

फूल फुलले हीच फुलाची अंतिम कथा फुलाचे साफल्य त्याच्या बहरण्यात आहे फूल विचारते,"फळा, तू कुठे आहेस?" फळ उत्तरते," मी तुझ्या हृदयातच आहे"!!! वाचल्याक्षणी मनावर मोहिनी घालणारे हे शब्द नव्हे ...

બુક રિવ્યુ શાંતનું - સિદ્ધાર્થ છાયા
by SUNIL ANJARIA
  • 1.1k

શાંતનું - શ્રી સિદ્ધાર્થ છાયા.થોડા વખત પહેલાં આ નવલકથા ઇ બુકનાં સ્વરૂપે પુરી કરી.પહેલાં તો નામ જોઈ ભીષ્મ વાળા શાંતનુ ની ઇતિહાસ કથા હશે એમ માનેલું. આ એક નાગર ...

स्वाभिमान
by राजीव तनेजा
  • 2.3k

कई बार हम लेखकों के आगे कुछ ऐसा घटता है या फिर कोई खबर अथवा कोई विचार हमारे मन मस्तिष्क को इस प्रकार उद्वेलित कर देता है  कि हम ...

निशां चुनते चुनते - विवेक मिश्र
by राजीव तनेजा
  • 593

कई बार कुछ कहानियाँ आपको इस कदर भीतर तक हिला जाती हैं कि आप अपने लाख चाहने के बाद भी उनकी याद को अपने स्मृतिपटल से ओझल नहीं कर ...