Hey, I am on Matrubharti!

खंजरों पे खंजरों से खंजरों की दुश्मनी,
खंजरों से बच गए बातो से मारे हम गए।

एक मोहब्बत ही है मेरी जो ना गिन पाया तू,
बाकी मेरी हर जूठी गलती का सही से हिसाब रखते हो तुम

बेह रहे थे हर इन आंखो से आंसू , तूने हर बार महज उसे पानी समज़ा,
रूहानी है मेरा इश्क़ तूने हर बार बदजिस्मानी समजा।??

Read More

सुकून के मामले में मंदिर मस्जिद को शमशान लिखती हूं,
बात धर्म और आस्था की हो तो उसको में दुकान लिखती हू।
भोजन के स्वाद का कम सत्य का जो आदि उसे में जुबान लिखती हू,
जो खुद के दम पर हो लोगो के बीच उसे में सही पहचान लिखती हू।

Read More

દોસ્ત ખરેખર ટેબલ માં પડેલા કાગળો જેવા હોઈ છે જરૂરી નથી લાગતા પણ ખોવાઈ જાય તો જાણે જીવની ઘટમાળ ,શ્વાસ જાણે થંભી ગયા હોઈ....બધું જ હોઈ છતાં જાણે કંઇક ખુટે,
જાણે હાથ થી કંઇક છટકી ગયું??

Read More

थोड़ी थक सी जाती हूं अब मै,
इस लिए दूर निकलना छोड़ दिया है
पर ऐसा भी नहीं की मैने अब चलना छोड़ दिया है।
फासले अक्सर रिश्तों में बढ़ाते है दुरिया,
पर ऐसा भी नहीं की मैने अपनो से मिलना छोड़ दिया है।
हा ज़रा सा अकेला महसूस करती हूं खुद को कभी,
पर ऐसा भी नहीं की मैने अपनापन छोड़ दिया है।
याद् रखती हूं सभी को परवाह बेवजह करती हूं,
पर बस कितनी? अब ये जताना छोड़ दिया है।

Read More

आंखे चाहे बन्द हो मेरी, उनमें उमड़ा सैलाब रखती हूं,
देने को तो सिद्दत से देती हूं, चाहे हो महाॅब्बत या हो जरूरत, समझ आए उसे भी कभी , में एक हद तक राह तकती हूं,
कसक होती है हमे भी कभी दिल में,
फिर भी हो गर सूखा जमकर बरसती हूं,
ना जीती हूं ना मरती हूं,
ना तलब है ना तड़पती हूं,
बस एक जान सा हे तू,
तुझ में बनती हू रोज और फिर रोज बिखरती हूं?

Read More

પ્રત્યેક પળ ને સાચવી હંકારવા છતાં ,
હોડી મારી જ્યાં ડૂબી એ તળાવ હતું!!!!

દિલ ના લાગે કિનારે તો હું શું કરું?
દૂર ઝંઝા પુકારે તો હું શું કરું?
હું કદી નાં ગણું તને પત્થર શમ ,
તુજ એ રૂપ ધરે તો હું શું કરું??
આંસુઓ ખૂબ મોંઘા છે માન્યું છતાં,
કોઈ પાલવ પ્રસારે તો હું શું કરું??

Read More

तेरे इश्क़ का स्वाद भी कुछ हवाओं के जैसा है,
कमब्खत सिर्फ महसूस होता के छु के गुजरा है...