Hey, I am on Matrubharti!

मोहब्बत का तुम से असर क्या कहूँ

नज़र मिलीं नहीं दिल धड़कने लगा

आप जमाने कि राह से ना आए

राह सीधी है हमारे दिल की

बस सीधे चले आए और समा जाए

ये मेरे इश्क़ की मजबूरियाँ माशा-अल्लाह

तुम्हारा राज़ तुम्हीं से छुपा रहा हूँ मैं

સંબંધો જાણે પતંગ સમા

ઢીલ જેટલી મળી ઉડ્યા ફલક સમા

डूबा हूँ इस क़दर तसव्वुर में

शक ये होता है मैं हूँ या तू है

छुप गए वो साज़-ए-ईश्क छेड़ कर

जी उठे "रुद्र" सुन ले जो मीठी साज

जुस्तुजू खोए हुओं की उम्र भर करते रहे

चाँद के हमराह हम हर शब सफ़र करते रहे

वो चार चाँद फ़लक को लगा चला हूँ 'रुद्र'

कि मेरे बा'द सितारे कहेंगे अफ़्साने

तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे

मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे

बेचैन इस क़दर था कि सोया न रात भर

पलकों से लिख रहा था तेरा नाम चाँद पर