साहित्य प्रेमी पढ़ना पसंद है लिखना सीख रहा हूँ ।

मातृत्व

गाँव की नई बनी सड़क पर शहरी बाबू की कार के सामने एक बुजुर्ग औरत आ गई । वो बचने की जुगत सोच ही रहा था कि औरत ने जाने का ईशारा किया " तुम जाओ बेटा ,तुम्हारी कोई गलती नहीं , मुझे ही बुढ़ापे में अब कम दिखने लगा है । "

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"नशा", को मातृभारती पर पढ़ें :
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