Best Humour stories Books in Gujarati, hindi, marathi and english language read and download PDF for free

दो बाल्टी पानी - 25
by Sarvesh Saxena

उधर सरला ने सुनील की चारपाई हिलाते हुए आवाज दी “ लल्ला...ओ लल्ला... उठ जा रे...बहुत सो लिया” | सुनील ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी | सरला ने फिर ...

भोला  के किस्से 
by राज बोहरे

बहुत पुरानी बात है। होशियारपुर नाम का एक गाँव था जिसमें भोला नाम का एक चतुर व्यक्ति रहता था। वह बड़ा बातूनी और हाजिर जवाब इंसान था। गाँव के लोगों ...

જિદા નું ભવિષ્ય પોલિટિકસ
by Bipinbhai Bhojani

જિદા નું ભવિષ્ય પોલિટિકસતરુણ અવસ્થામાં ડગ માંડી રહેલો જિદો બહુ જિદ્દી માણસ. જિદાને કોઈપણ કામ કરવું હોય તો જ કરે ! કરે ત્યારે જિદાના હો હા હોકીરો જુઓ . ...

કાગડો દહીંથરું લઇ ગયો
by Leena Patgir

"રાજ, માંડ માંડ પપ્પા તને મળવા માટે રાજી થયાં છે. પ્લીઝ તું પણ માની જા. " "ઓક્કે તો કાલે સવારે 9 વાગે આવું છું. લવ યુ. " "લવ યુ ...

मेरा पति सबका है
by Swatigrover

अरे! भाभीजी  भैया  नहीं है,  क्या  घर  पर ? मोहन  दूधवाले  ने  कहा।  क्यों  क्या  काम  है ?  परिधि  ने  पूछा ।  जी  वो  आधार  कार्ड  बनवाना  है । ...

દ્રષ્ટિકોણ - ચિંતા કે શંકા
by Kinjal Patel

આજે ફરીથી મને ઑફિસથી આવતા મોડું થઈ ગયું અને હજી રસ્તામાંથી શાકભાજી પણ લેતા જવાનું હતું. કેટલું પણ વ્યવસ્થિત રાખવાની કોશિશ કરું ગડબડ થઈ જ જતી અને કામ પણ ...

ચાર્ટડ ની ઓડિટ નોટસ - 16 - સંરક્ષણ ક્ષેત્રે ક્યારે આત્મનિર્ભર ?
by Ca.Paresh K.Bhatt

# ચાર્ટડ ની ઓડીટ નોટ્સ -70  ## CA.PARESH K.BHATT# ___________________________સંરક્ષણ ક્ષેત્રે ક્યારે આત્મનિર્ભર ?___________________________ રાફેલ  વિષે મારે વિશેષ કઈ નથી લખવું કેમકે મારા કરતા આપ સૌ સવિશેષ જાણો છો . ...

दो बाल्टी पानी - 24
by Sarvesh Saxena

रात आधी बीत चुकी थी आंधी पानी भी अब धीमा हो चला था, चारों ओर झींगुर की आवाज सुनाई दे रही थी, पूरा गांव अब नींद के आगोश में ...

એક અદભુત સર્વેક્ષણ
by Bipinbhai Bhojani

1)  એક અદભુત સર્વેક્ષણમેળામાં યુવાનો , યુવતીઓ , બાળકો વગેરે જોરશોરથી દેડકા વગાડે છે. જો આપણે જરા ધ્યાનથી નજર કરીએ તો માલૂમ પડશે કે થોડા લોકો ધીમા અવાજે તો ...

ચાર્ટડ ની ઓડિટ નોટસ - 15 લુક ડાઉનનો સમય (નીચું જોવા નો સમય)
by Ca.Paresh K.Bhatt

# ચાર્ટડની ઓડિટ નોટ્સ -70 ## Ca.Paresh K.Bhatt #________________________" લુક " ડાઉનનો સમય (નીચું જોવા નો સમય)________________________         માણસ પ્રાથમિક અવસ્થામાં હતો ત્યારે પ્રકૃતિના સાનિધ્યમાં રહેતો હતો. ...

बेटे से हारा नहीं हूँ - एक व्यंग
by r k lal

बेटे से हारा नहीं हूँ- एक व्यंग आर0 के0 लाल                 देशी कहावत है कि “बाप सबसे जीत सकता है लेकिन अपने बेटे से ही हार जाता है”। ...

दो बाल्टी पानी - 23
by Sarvesh Saxena

गुप्ता जी ने पिंकी की ओर घूरकर देखा और बोले “ अरे पिंकिया का जरूरत थी ऐसी आंधी पानी में पानी भरने की वह भी अंधेरे में, अरे हमें ...

કથા કોરોનાની... - (હાસ્ય વાર્તા)
by Anmol Anil Saraiya

    "અરે યાર, કેમ છે, તું?" અને મેં તેના માસ્ક પહેરેલા ચહેરા સામે ધ્યાનથી જોયું… અને કહ્યું :     "અરે મલય તું? હું તો તને ઓળખી જ ન શક્યો. કોલેજ છોડ્યા બાદ ...

જોકે આપણે ત્યાં તો આ બન્ને વસ્તુ માં બધા જ મૂકે જ !
by Bipinbhai Bhojani

શિક્ષક જો.કે. વિદ્યાર્થી મુ.કે. ને : બોલ મુ.કે. આ શ્રાવણ માસમાં આખો મહિનો એકટાણા કરવામાં આવે છે તેનું મુખ્ય વૈજ્ઞાનિક કારણ શુ છે ?વિદ્યાર્થી મુ.કે. : અત્યારે ઇકોનોમીનું ઠેકાણુ ...

New Gen Shakunthalam - 2
by Venu G Nair

When Shakunthala's car reached at the gate of Dushyanth's Bangalow two security men in full uniform and wearing rifles with them standing  in front of the Gate.  Raju (driver) ...

जो घर फूंके अपना - 53 - चले हमारे साथ! - अंतिम भाग
by Arunendra Nath Verma

जो घर फूंके अपना 53 ----------चले हमारे साथ! पर अगले ही क्षण आई असली मुसीबत ! उस पार की तो छोडिये, इस पार ही, यानी रेस्तरां के दरवाज़े से, ...

दो बाल्टी पानी - 22
by Sarvesh Saxena

गुप्ता जी और गुप्ताइन बड़े परेशान थे, कि पिंकी अब तक क्यूँ नहीं आई और मौसम उन्हें और डरा रहा था, गुप्ता जी आखिर पिंकी को ढूंढने घर से ...

जो घर फूंके अपना - 52 - चक्कर पर चक्कर, पेंच में पेंच
by Arunendra Nath Verma

जो घर फूंके अपना 52 चक्कर पर चक्कर, पेंच में पेंच इस बार लक्षण अच्छे थे. प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में कोई फेर बदल नहीं हुआ. नियत दिन हमने पालम ...

जो घर फूंके अपना - 51 - फिर वही चक्कर
by Arunendra Nath Verma

जो घर फूंके अपना 51 फिर वही चक्कर इसके बाद दो एक महीने बिना कुछ असामान्य घटना के बीत गए. पिताजी ने बताया तो था कि मुझसे मिलने किसी ...

New Gen Shakunthalam - 1
by Venu G Nair

Mr. kannua (maharshi), after an eight months foreign trip, while returned to his Ashram at the forest where he was doing his Tapasia since last so many years, he ...

लॉकडाउन के पकौड़े
by Archana Anupriya

             " लॉकडाउन के पकौड़े"बाहर बूँदाबादी हो रही थी।मौसम बड़ा ही सुहावना था।ठंडी हवा,हरियाली का नजारा और लॉकडाउन में घर बैठने की फुरसत - मैं बड़े आराम से अपनी सातवीं ...

લોકડાઉનની લ્હાય
by Rana Zarana N

લોકડાઉન - ઘરબંધી કે કર્ફ્યુ કે જનતા કર્ફ્યુ જેવા શબ્દો 90ના દાયકામાં જન્મેલી એક આખી પેઢીએ અત્યાર સુધી માત્ર સાંભળ્યા હતાં. પોતાના કુટુંબના સભ્યો પાસેથી કર્ફ્યુ ના કારનામા સાંભળીને ...

जो घर फूंके अपना - 50 - ज़िंदगी भर नहीं भूलेगी वो
by Arunendra Nath Verma

जो घर फूंके अपना 50 ज़िंदगी भर नहीं भूलेगी वो --- शाम को ठीक सात बजे मैं वोल्गा रेस्तरां में दाखिल हुआ तो एक नीची टेबुल के सामने सोफे ...

दो बाल्टी पानी - 21
by Sarvesh Saxena

आँधी के साथ तेज बारिश शुरू हो चुकी थी पिंकी सड़क के उस पार वाले नल के पास नीम के पेड़ के नीचे खड़ी सुनील की राह देखते-देखते परेशान ...

जो घर फूंके अपना - 47 - गरजत बरसत सावन आयो री !
by Arunendra Nath Verma

जो घर फूंके अपना 47 गरजत बरसत सावन आयो री ! घड़ी की सेकेण्ड वाली सुई ने घूमकर इधर ठीक आठ बजाए और समय की अतीव पाबंदी के साथ, ...

बस नमक ज़्यादा हो गया - 4 - अंतिम भाग
by Pradeep Shrivastava

बस नमक ज़्यादा हो गया - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 4 सादगी से शादी करने के उसके लाख आग्रह के बावजूद उसके मां-बाप बड़े धूमधाम से शादी कराने के लिए ...

चूरमा प्रसादी
by Kumar Gourav

कल विवाह पंचमी पर संस्कृति बचाओ समिति द्वारा चौक पर हर साल की तरह इस बार भी जानकी विवाह का खेला हो रहा था । खालिद मियाँ विधायक के ...

जो घर फूंके अपना - 48 - जान बची तो लाखों पाए
by Arunendra Nath Verma

जो घर फूंके अपना 48 जान बची तो लाखों पाए हम जल्दी ही भोपाल के ऊपर उड़ते हुए भोपाल कंट्रोल को अपनी पोजीशन रिपोर्ट देते लेकिन भोपाल के ठीक ...

जो घर फूंके अपना - 46 - बड़ी कठिन थी डगर एयरपोर्ट की - 2
by Arunendra Nath Verma

जो घर फूंके अपना 46 बड़ी कठिन थी डगर एयरपोर्ट की - 2 पता नहीं मेरा गिडगिडाना सुनकर उन्हें दया आ गई या उन्हें लगा कि वह दूधवाला हमें ...

बस नमक ज़्यादा हो गया - 3
by Pradeep Shrivastava

बस नमक ज़्यादा हो गया - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 3 थाने की हर महिला एम्प्लॉई को वह अपनी रखैल समझता था। सबको उसने कोई ना कोई नाम दे रखा ...

दो बाल्टी पानी - 20
by Sarvesh Saxena

उधर सुनील को होश आया तो सरला की जान मे जान आई, वो उसके माथे पे हाथ रखके बोली, "अब कैसा लग रहा है तुझे? तूने तो हमारा कलेजा ...